सोलर सिस्टम का रख रखाव
Solar Power System – maintenance

देश में निरंतर बढ़ती बिजली की दरों के चलते एक सस्ते पर्याय के रूप में और पर्यावरण के प्रति जनता में बढ़ती एक जिम्मेदारी की भावना अनेक लोगो को सौर बिजली निर्माण प्रणाली को लगाने के लिये प्रेरित कर रही हैं। भारत सरकार द्वारा लायी गयी अनेक अनुकूल योजनाओं के चलते भी जनता का रुझान सौर ऊर्जा प्रणाली को लगाने के लिये काफी बढ़ा हैं।   

भारत अब तक तक़रीबन ५० गीगावाट (१ गीगावाट = १००० मेगा वाट) से थोड़ा अधिक सौर बिजली निर्माण करने में सफल हुआ हैं।  भारत का लक्ष्य ११२ गीगावाट सौर बिजली निर्माण का हैं।  इतने बड़े लक्ष्य को भारत जल्द ही पूरा करेगा ऐसी आशा करते हैं।  इसमें जितना जरूरी अधिक से अधिक सौर प्रणाली को उभारना हैं, उतना ही जरूरी हैं उसका रखरखाव।  अगर रखरखाव ठीक से नहीं हुआ तो भला वह कैसे लम्बे समय तक पूर्ण क्षमता से काम कर पायेगा। केवल बडे व्यावसायिक स्तर के सौर बिजली निर्माण संयंत्र ही नही अपितु जो आप अपनी छत पर संयंत्र लगाते हैं वह भी तभी अच्छा काम करेगा जब हम उसका ख़याल रखेंगे।

सही रखरखाव नहीं होने से सौर बिजली उत्पादन में काफी कमी आती हैं। कई जगह पर मैंने करीब १० से १५ प्रतिशत तक गिरावट देखी हैं।

फिर वह प्रणाली आपकी किसी छत पर लगी हो या मैदानों में, रख रखाव में निम्न कुछ बाते समान रूप से ध्यान देने लायक हैं।

धुल और छाँव सौर बिजली निर्माण प्रणाली की दुश्मन नंबर एक हैं। 

धुल भारत के करीब करीब हर छोटे बड़े शहर की समस्या बन चुकी हैं। जिसके चलते सौर पट्टिकाओं (सोलर पैनल) पर काफी धुल जमा होने लगती हैं।  धुल की परत जितनी मोटी होगी उतना ही कम सूरज का प्रकाश सौर पट्टिकाओं में लगे सौर – सेल तक नही पहुंच पायेगा।  सौर-सेल पर जितनी अधिक सूर्य की किरणे  पड़ेंगी उतनी अधिक बिजली हमे प्राप्त होगी और जितनी कम पड़ेंगी उतना हमारा नुक्सान होगा यानी उतनी कम बिजली हमे प्राप्त होगी।  सौर पाट्टिकाओ की सफाई अनिवार्य रूप से करना ही चाहीये। 

आपने अक्सर अपने आस पास लगे सौर संयंत्रो को देखा होगा। लोग अक्सर बड़े उत्साह से इसको लगवा तो लेते हैं परन्तु थोड़ा समय बीतने पर उसकी सफाई में कोताही करते हैं।  महीनो तक छत पर लगे अपने इस महत्वपुर्ण  यंत्र की और ध्यान नही देते हैं। अगर किसी एक हिस्से पे भी धुल पड़े या छाँव गिरे तो भी पूरी सौर पट्टिकाओं की उस स्ट्रिंग (श्रृंखला) में उत्पादन कम हो जायेगा।

अब प्रश्न उठता हैं कि सौर पट्टिकाओं की सफाई कैसे करें?

सौर पट्टिकाओं की सफाई काफी आसान होती हैं। कोई ख़ास अलग से कुछ नहीं करना होता हैं।  जैसे आप अपने कार की कांच की धुल साफ़ करते हैं बस वैसे ही थोड़ा साबुन और पानी से आपकी सौर पाटिकायें साफ़ की जा सकती हैं। 

निम्न बातो का ध्यान रखें  :-

१) सौर पट्टिकाओं की सफाई सूर्योदय से पहले अथवा सूर्यास्त के बाद ही करें।

२) भरी दोपहरी में सौर पट्टिकाओं में से बड़े पैमाने में बिजली का प्रवाह होता हैं अतः वह घातक हो सकता हैं। सफाई के दौरान बिजली का झटका लगने की सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता हैं। 

३) साबुन और पानी के धब्बे ना पड़े इसका ध्यान रखना जरूरी हैं। 

४) क्षार युक्त पानी का प्रयोग ना करें, इससे पट्टिकाओं पे क्षार की परत बनने लगेंगी जिससे उसकी आयु कम हो जायेगी।

५) एल्युमीनियम की फ्रेम में पानी जमा होने ना दे। अगर ज्यादा समय तक उसमे पानी जमता रहा तो एल्युमीनियम की फ्रेम में क्षरण होने लगेगा। 

छाँव से बचाव जरूरी हैं ।

अगर आपने जहाँ सौर बिजली प्रकल्प लगा रखा हैं, वहां पर आस पास अगर ऐसी कोई ऊँची चीज़ हैं जिसकी थोड़ी भी छाँव सौर पट्टिकाओं पर पड रही हैं जैसे कोई पेड़, बड़ा पाईप, इमारत इत्यादी,  तो आप पाएंगे की आपकी प्रणाली उतनी बिजली नही बना रहीं हैं जितनी के लिए उसे डिज़ाइन किया गया हैं।  यानी आपका नुक्सान हो रहा हैं। अगर किसी भी सौर सेल पे छाँव पड रही हो तो वह सेल काफी गरम होने लगता हैं। आप पाएंगे कि उस सौर पट्टिका के अन्य हिस्से के मुकाबले यह सेल (जिस पर छाँव गिर रही हैं) अधिक गरम होता हैं। कई सेल इतना गरम हो जाता हैं की उसमे आग भी लग सकती हैं। इसलिए छाँव आपके सौर बिजली निर्माण प्रणाली के लिए एक महाविनाशकारी शत्रु से कम नहीं हैं। अतः आपकी प्रणाली को छाँव से यथा सम्भव बचाना होगा।

विद्युतीय (इलेक्ट्रिकल) हिस्से का रखरखाव आप अपने सौर संयंत्र आपूर्तिकर्ता के प्रशिक्षित अभियंताओं से नियमित रूप से करवाते रहे। यहाँ एक अच्छा प्रशिक्षित व्यक्ति ही होना चाहिए, किसी अन्य के द्वारा छेड़छाड़ घातक हो सकती हैं।   

एक सामन्य सौर बिजली उपभोगता के नाते इस तरह अगर अपने संयंत्र का आप ध्यान रखेंगे तो आप लम्बे समय तक सौर बिजली का उपभोग कर सकेंगे। 

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